गुरुवार, 22 अप्रैल 2021

lockdown buddha

      

आज ये तय करना मुश्किल है, कि साँस अगले पल आएगी की नहीं ,, देश की हवा ही कुछ ऐसी हे।
क्योंकि आपकी साँसों पर आपका नहीं देश की सरकार ,, नेता,, सरकारी अमला,, अस्पताल,, चोर बाज़ार,, इनका ही अधिकार हे।
माना कि, इसमें उतना ही दोष इस जनता का हे,,, जो मस्जिद मंदिर के चक्कर मैं फँसती बार बार हे।
साल गुजर गया सरकार ने कुछ किया नहीं ओर जनता ने कुछ समझने की कोशिश ही नहीं की। वो कैसे,, 
सरकार चिल्लाती रही मास्क पहनो,, जनता क्यों मास्क पहने,,, इसमें भी राजनीति क्योंकि अगर सरकार भाजपा की हे तो मास्क नहीं पहनना हे। क्योंकि ये वाइरस भाजपा का हे तो लो भुगतो,, इसमें भी हमारे देश के  कुछ नेता ये  भाजपा की दवाई हे नहीं लगवानी हे,, अगर एक पार्टी का नेता ऐसा बोलता हे तो उसके समर्थक भी उसके साथ,, लेकिन समर्थक कभी नहीं सोचता,, वो नेता हे,, उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा उसके पास पैसा हे पावर,, तुम्हारे  पास क्या,, बाबा जी का घंटा अब हिलाओ बैठकर ,, अगर इस सबको कोई ठीक कर सकता हे तो वो मीडिया,, लेकिन वो बिका हुआ हे। 
मेरा अपना अनुभव हे,,सच कितना नज़र आता हे,, वो भी बँटा हुआ हे,, आज लोग ये कहने मैं ज़रा भी संकोच नहीं करते की कौन सा चैनल  किस पार्टी को सपोर्ट करता हे ,, ओर इसी वजह से आज जनता किसी मीडिया कर्मी का सम्मान नहीं करती हे,,
अगर कोई ईमानदार नेता या अधिकारी आ भी जाए तो उनको ख़त्म करने मैं वक्त नहीं लगता हे,, लेकिन सारा दोष मेरी नज़र मैं देश की जनता का हे क्योंकि वो उनको चुनती ही नहीं जो हक़दार हे देश को चलाने का वो उसको चुनती हे जिसमें उसकी जाति नज़र आती हे ओर इसी का फ़ायदा उठाता हे नेता,, आज आँक्सीजन की वजह से जाने जा रही हैं ।
वक्त रहते अगर देश की जनता नहीं सुधरी तो बची खुची हवा भी नहीं मिलेगी।क्योंकि नेताओं ने प्रक्रति को बाँट दिया वो कैसे ये पीपल का पेड़ हे हिंदुओं का हे ये इमली का पेड़ मुसलमान का हे ये जो पेड़ आपको पूरे समय जीवन यानी O२ देता हे हम उसको ही काट देते हैं ओर अपनी साँसों की लम्बाई कम कर देते हैं।
हम पेड़ लगाते कम काटते ज्यदा हैं ।
हम तो यही कहेंगे देश को अगर आने वाला कल अच्छा देना चाहते हो तो उनको चुनो जो सिर्फ़ देश ओर जनता के लिए सोचते हैं   ना कि हिंदू, मुस्लिम या जाति के लिए लड़ते हैं अभी भी वक्त हे,, जनता अगर  समझे तो,,, 
नीरज तिवारी 




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