रात भर चलता रहा चाँद
मेरे संग सफ़र मैं
मै भी तन्हा वो भी तन्हा
दूर थे पर थे सफ़र मैं
शहर गुज़रा गाँव गुज़रा
और गुज़रा उनका घर
जिनसे मिलने को तरसते
हम रहे उम्र भर
कह सके न ढाई आखर
बस अधर हिलते रहे
प्रेम के एक बोल को
सुनने को तरसते रहे
रात भर चलता रहा
चाँद मेरे संग सफर मैं
मैं भी तन्हा वो भी तन्हा
दूर थे पर थे सफ़र मैं
मेरे संग सफ़र मैं
मै भी तन्हा वो भी तन्हा
दूर थे पर थे सफ़र मैं
शहर गुज़रा गाँव गुज़रा
और गुज़रा उनका घर
जिनसे मिलने को तरसते
हम रहे उम्र भर
कह सके न ढाई आखर
बस अधर हिलते रहे
प्रेम के एक बोल को
सुनने को तरसते रहे
रात भर चलता रहा
चाँद मेरे संग सफर मैं
मैं भी तन्हा वो भी तन्हा
दूर थे पर थे सफ़र मैं
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