बुधवार, 19 सितंबर 2012

 रात भर चलता रहा चाँद
मेरे संग सफ़र मैं
मै  भी तन्हा वो भी  तन्हा   
दूर थे पर थे सफ़र मैं

शहर गुज़रा गाँव गुज़रा
और गुज़रा उनका घर
जिनसे मिलने को तरसते
हम रहे उम्र भर

कह सके न ढाई आखर
बस अधर हिलते रहे
प्रेम के एक बोल को
सुनने को तरसते रहे

रात  भर चलता रहा 
चाँद मेरे संग सफर मैं
मैं भी तन्हा वो भी तन्हा
दूर थे पर थे सफ़र मैं

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