सोमवार, 17 सितंबर 2012

कर के यकीं हम तुम पर तो
सब कुछ अपना वार गए
लिख दिया कलम से कागज़ पर
वो चंद  अछऱ   मुझको मर गए
कुछ कहा नहीं कभी कोयल ने
पपीहे के पीऊ से हर गये
कुछ ऐसे कारे बादल बरसे
मेरे आंसू उनके साथ बहे
फाल्गुन के टेसू और पलाश
रंग ऐसे मुझ पर डार गए
चलत डगर टोंके हे लोग
हाय जिंदा मुझको मर गये
बोलत नैना रीझत थे हमको
मुस्कान अधर की साथ लहे
मन ही मन तुम सोचत ही रहे
हम अभिलाषा का हर लिए
इस दुनिया से हर गये

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