शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2011

कल की ही बात थी

क्यों टूटते रिश्ते
व्यथित मन दुन्ड़ते रिश्ते
कल की बात थी
वो मेरे पास थी
संजोय सपने नयन मैं
दुन्द्ती शयन मैं

क्यों टूटते रिश्ते
क्यों जुड़ते हैं रिश्ते
पैदा हुए जब हम
जैसे कल भोर की बात थी
मुहं से निकले बोल
उसमें माँ मां की आवाज़ थी
मां मेरी कहती हे
तेरी तोतली आवाज़ थी
मुझ से मेरी मां का रिश्ता
वो पहली सोंगात थी

कल की बात थी ------
चंद महने बीत गए
और हम दोड गए
तोतले जो बोल थे
वो पीछे छुट गए

मां से रिश्ता जोड़ के
पापा के रिश्ता आ गए
मां ने दिया परिचय सभी का
कोन बुआ ,भाई बहन
कोन छोटा कोन बड़ा
देखता हूँ क्या सभी का
पाप का था भरा घड़ा
वो भी फिर होले होले मेरे पीछे पड गए

देखते ही देखते कुछ साल बीत गए
पड़ने के लिए जब हम स्कूल भेजे गए
वहां के अजनबी भी मेरे साथ जुड़ गए
रिश्तों की इस कड़ी मैं एक कड़ी जुड़ गई
जब मेरे पीछे एक लड़की हाथ धोके पड गई
बीतते फिर चले दिन बड़े प्यार से
क्या पता था ये रिश्ता
हे दिन दो चार के
हुआ फिर तबादला मेरे तो बाप का
छुट गया फिर एक शहर
रिश्तों की राख का
उसमें भी उस लड़की की
सबसे प्यारी याद थी
कल की ही बात थी
वो मेरे साथ थी

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