शनिवार, 8 अक्टूबर 2011

chamchon ki jay bolo

बैठा मुस्काया मुहं खोला 
बहुत पुराना चमचा बोला  
सुनो सख्झी है जग सारा 
लम्बा हे इतिहास हमारा 
चमचा नर चमची नारी हे 
चमचों की संतित सारी हे 
कोई बड़ा हे कोई छोटा हे  
यह पतला वह मोटा हे 
यह इस अफसर का चमचा हे 
और वह घर घर का चमचा हे
यह चमचा हे घर वाली का 
और वह चमचा हे साली का 
सत्य सनातन है यह प्यारे
चमचे ही चमचे  हैं सारे   
मीठे मीठे बोल सुनाये                                                                                                                           चमचे सब संताप मिटायें 
जय बुलति जो बार बार हे 
चमचों  का ही चमत्कार हे  
बिगड़ रही हो बात बना लो  
जो चाहो वो कम करालो  
हाकिम के चमचों पर जाओ 
हाथ जोड़ कर भोग लगाओ 
अंतर की आँखों को खोलो
बोलो चमचों की जय बोलो   
मूलमंत्र ये रखो याद 
चमचा गीरी जिंदाबाद
 














 





 

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