बुधवार, 30 नवंबर 2011

वर्षा

टिप टिप ठपर-ठपर
छोड़ के अपनी डगर
ये बहता हे
पानी किधर
ये तो वर्षा रानी
जो नाच रही झूम झूम के
पट पट
बहुत जोर के बुलबुले उठते
लिए बहुत अरमान
पल भर मैं गायब हो गए
घास फूस पेड़ों की पति
चमक उठी आज तो साथी
झूम उठा जामुन का पेड़
कहता हे वर्षा रानी से
क्या खूब किया तुमने कमाल
अब फल फूलेगी मेरी जामुन
खायेंगे ये बच्चे नादान
तभी जोर से बदल धड़का
बिजली को de आदेश तो kadka
जाके गिर कहीं पर
ओ मेरी बैरन
बिजली फिर जोरों से कडकी
भागे घरों को लड़के लड़की

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