मैंने एक बार सोचा की
मैं अपने अतीत झाँककर तो देखूं
लेकिन मेरा अतीत मेरी हंसी उडाने लगा
माया का नाम न जाने कहाँ से लेने लगा
मेरा अंतर्मन चोंका बिना शिकन लिए चेहरे पे
क्योंकि भरोसा था मुझे अपनी माया पे
क्योंकि वो हमेशा मेरे साथ चलेगी
और फिर मैं अपने अतीत मैं झाँकने लगा
मुझे मालूम भी नहीं था कि
कब उस बैरन माया ने मुझे छला
मेरे पग कब बढ चले उस और
फिर मिला मुझे परिचय पत्र
बस यहीं से शुरू होता हे
फिर न विराम लेने वाली माया का इतिहास
लेकिन सम्पूर्ण नहीं हुआ
पता नहीं उसकी किस
अदा ने मुझे छला
और मैं भूलकर शेह्तुत से भी मीठे
इमली से खट्टे कागज़ पे
और उस भोली सी माया ने
मुझे अपने आँचल की चाय मैं
विश्राम दिया
अधुरा ठहराव था वो
जो की पूरा न हुआ
आज भी जब मैंने
उस बिंदु से पूछा
तो पता चला की
वो पराई हो गई हे
लेकिन क्या वो सकुचाई होगी
मेरी याद आई होगी
नहीं माया माया हे
न मेरे पास न उसके पास
आज भी जब कहीं माया का जिक्र आता हे
मेरा अतीत मुझे कोसने लगता हे
पता नहीं ये माया
हर किसी को क्यों भाती हे
क्या अब भी माया को मेरी याद आती होगी
बस स्म्रेतियाँ ही बाकी हैं
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