मंगलवार, 29 नवंबर 2011

मैं चाहूँ

मैं चाहूँ कोई मुझे प्यार करे
थपकी दे दे दुलार करे
सरे राहों मैं पकडे
बैयाँ मोरी
कोई ऑंखें मुझ से चार करे
मतवारे कमल के नैनं से
शबनम जैसे मोती हैं गिरे
पीलूं होटों से मैं उनको
मदिरा की जरुरत फिर न परे
मैं चाहूँ मुझे कोई प्यार करे
पाजैब पैर मैं पहनोंऊँ
सिंदूर से उसकी मांग सजाउँ
छोड़ बाबुल का देश वो गोरी
मेरे आंगनवा पांव धरे
मैं चाहूँ मुझे कोई प्यार करे
जब छाए गम की बदली
वो अपना आंचल लहराए
जीवन की डगर पर चलने को
वो पथ मैं खड़ी इंतजार करे
मैं चाहूँ कोई मुझे प्यार करे

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